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" जीवन पुष्प में आप सभी का हार्दिक स्वागत है "

" प्रकृति की गोद में खिला एक सुंदर कोमल पुष्प कली से फूल बनकर अपने सम्पूर्ण वातावरण को सुगन्धित करने का ध्येय रखते हुये कभी गर्मियों की तपिश, तो कभी बरसातों की बौछार, तो कभी शर्दियों की ठिठुरन और ना जाने क्या क्या सहकर ये अपने अस्तित्व को कायम रखने के लिए हर संभव कोशिश करता है। ये आने वाली पीढ़ी का सृजन कर मुरझाकर सूख जाता है और धरती पे गिरकर मिट्टी में विलीन हो जाता है। हमारा संपूर्ण मानव जीवन भी एक पुष्प के समान है...। "

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26 September, 2011

कब दुलहन बनायेगा ?

मुंतजिर हूं मैं तेरी, तू कितना सितम ढायेगा
ये उसूल मुहब्बत की तुम कब निभायेगा ?

आया जीस्त का पैगाम परवर दीगार से
हमे हकीकत से रुबरु तू कब करायेगा ?


मेरी कोई तुम बिन, वजूद नही हमदम
मेरे बिना तू भी नही जी पायेगा।

पोछ दो आंसू मेरी तुम अपनी हथेली से
कब तलक तुम तन्हा हमे रुलायेगा ?

कब लायेगा बारात, शहनाईयों के साथ
कब हमे तुम अपना दुलहन बनायेगा ?

वादा किया थामूंगा, उम्र भर के लिये
कब वो कसम फख्र से आकर निभायेगा ?

मुरीद हूं मैं तेरी, उम्मीद के चमन में
दे कोई सदा, नही तो सांस टूट जायेगा।
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