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" जीवन पुष्प में आप सभी का हार्दिक स्वागत है "

" प्रकृति की गोद में खिला एक सुंदर कोमल पुष्प कली से फूल बनकर अपने सम्पूर्ण वातावरण को सुगन्धित करने का ध्येय रखते हुये कभी गर्मियों की तपिश, तो कभी बरसातों की बौछार, तो कभी शर्दियों की ठिठुरन और ना जाने क्या क्या सहकर ये अपने अस्तित्व को कायम रखने के लिए हर संभव कोशिश करता है। ये आने वाली पीढ़ी का सृजन कर मुरझाकर सूख जाता है और धरती पे गिरकर मिट्टी में विलीन हो जाता है। हमारा संपूर्ण मानव जीवन भी एक पुष्प के समान है...। "

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28 September, 2011

सिसकती रुह

सिसकती रुह परेशान है।
मेरी जिंदगी अब श्मशान 
है।


रंगत बुलंद है रंजिशों की
रंजीदा दिल बेजान है।

 शिगाफ है बेआबरु जिगर में
गर्दिश में हमारी शान है।
 

तअल्लुकात क्या रखूं शीरीनी से,
जब जहर में बुर्द मेरी जान है।

बेगाना हुआ दिल बेकसूर
अब बेहया का क्या मुकाम है?

सूफी बनने को चला था वो,
आज खाक मे उसका ईमान है।

क्यों उम्मीद करुं और सब्र करु
जब रहगुजर का काम तमाम है।


13 comments:

रश्मि प्रभा... said...

bahut badhiyaa

anju(anu) choudhary said...

बहुत खूब...उम्दा

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 26/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

अरूण साथी said...

साधु-साधु

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अच्छी गज़ल ..

समसान की जगह शायद शमशान आना चाहिए

सदा said...

वाह ...बहुत बढि़या।

वन्दना said...

बहुत खूब

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...
सादर बधाई

सदा said...

कल 28/12/2011 को आपकी कोई एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, कौन कब आता है और कब जाता है ...

धन्यवाद!

Prakash Jain said...

behtareen

अजय कुमार झा said...

आपके ब्लॉग का कलेवर बहुत ही खूबसूरत है । सुंदर रचना । आगामी वर्ष के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं

Rajput said...

लाजबाब रचना
नववर्ष की मंगल कामनाएं .

Reena Maurya said...

सुन्दर अभिव्यक्ति ...

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