* मुखपृष्ठ * * परिचय * * टैली इनर्जी * * रोमन-हिन्दी * * महाशब्दकोश * * कनवर्टर * * हिन्दी पैड * * संपर्क *
" जीवन पुष्प में आप सभी का हार्दिक स्वागत है "

" प्रकृति की गोद में खिला एक सुंदर कोमल पुष्प कली से फूल बनकर अपने सम्पूर्ण वातावरण को सुगन्धित करने का ध्येय रखते हुये कभी गर्मियों की तपिश, तो कभी बरसातों की बौछार, तो कभी शर्दियों की ठिठुरन और ना जाने क्या क्या सहकर ये अपने अस्तित्व को कायम रखने के लिए हर संभव कोशिश करता है। ये आने वाली पीढ़ी का सृजन कर मुरझाकर सूख जाता है और धरती पे गिरकर मिट्टी में विलीन हो जाता है। हमारा संपूर्ण मानव जीवन भी एक पुष्प के समान है...। "

Followers

23 February, 2019

जीवन का ललकार

जीवन में कितना जंग है !
अब बचा नहीं उमंग है !

एक ही पथ है, एक ही रथ है
फिर अपनों से कैसा हठ है  !


सब सारथि को ललकार रहा
पूर्वज को धिक्कार रहा !
धन –धान्य की वशीभूत में
भौतिक सुखों की अभिभूत में
पुत्र पिता पे हुंकार रहा !!

क्या लाया था, क्या पाया है ?
जो समेट रहे हो सब जाया है
सृष्टी को जानो और धैर्य करो
यहाँ तो प्रभु सब माया है !!

01 October, 2017

मेरा रौनक


 
मैं उब गया था जीने से
जब दर्द सिमटा था सीने से !
 
मर ही जाते मयखाने में,
कोई रोका ना होता पीने से !

 
छलते आये जो मासूमियत पे
मुंह मोड़ लूँगा सब  कमीने से !

 
कल तक मुरझाया था ये चेहरा,
धुलकर निखर गया पसीने से ! 

 
उम्मीद सोई थी वर्षों तलक
आज जागी है करीने से !

 
तुम आये तो रौनक आया 
एक जरिया मिला है जीने से...!

08 June, 2016

जज्बा-ए -मोहब्बत

है जिन्दा आज भी जज्बा    
अभी मैं झुक नहीं सकता !   
आरजू मुकम्मल हो या न हो
सफ़र ये रुक नहीं सकता !!
जब तुम याद आती हो 
एक कसक सी जगती है...
निगाहें फलक पे टिकती है
नजरे नम हो उठती है...
वही तराना गाता हूँ...
शबनम फिर से टपकती है ...!!

प्रेम का दीप



अब अपना मिलन है चंद घड़ियों का
मुद्दत से जुड़े थे जिस बंधन में,
टूटेगा मोती अब उन लड़ियों का !

गले कभी अब हम मिल न सकेंगे
रख के सर तेरे कंधों पर,
कभी सिसक कर रो न सकेंगे !

 
जुदा होकर  भी गम नहीं  करना
अपनी आँखें  नम नहीं करना  

मिलकर राधा –कृष्णा को देखो
कभी एक नहीं हो पाए थे  !
फिर भी दुनिया में अपना वो
प्रेम का दीप जलाये थे ...!

11 July, 2015

प्रेम पथ

सहर्ष प्रेम पथ पर
हम दीपक जलाये
थी चाहत उड़ने की
दूर पंख फैलाये
था तकदीर का दोष
या तदबीर का रोष
जो मुन्तजिर हुए हम
और छुट गया संग
गूंजती है आज भी
आवाज रूहानी सी
उठती है सीने में
एक कसक पुरानी सी
अब नीर नैनों के   
स्वछन्द बह जाये
एक संदेसा है उनको  
वो भी दिल से भुलाये     
ताकि बिसरी हुई यादें
अब, और न रुलाये...!

लिखिए अपनी भाषा में...

जीवन पुष्प

हमारे नये अतिथि !

Angry Birds - Prescision Select