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21 March, 2025
23 February, 2024
28 September, 2021
दरख़्त
मैं वो दरख़्त हूँ जो बुत्त बनकर अभी भी खड़ा हूँ...
अब देखना हैं ज़मीर उस ओस के बुन्द की...
कि वो मेरे आगोश में गिर कर समाते है...!
या ज़मीं पर लूढ़क कर मिट्टी की प्यास बुझाते है ...!!
30 July, 2020
गुलाम है ज़िन्दगीउस मौत का
जो कयामत तक साथ निभायेगा !
इंतेजार है ज़िन आँखों को उसकी
वो कभी अब अश्क नहीं बहायेगा ...
05 January, 2012
आँखों का ईशारा
लब हिले ना हिले,
हमें आँखों का ईशारा कम तो नहीं !
तुम मिलो ना मिलो,
हमें यादो का सहारा कम तो नहीं !!
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