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" जीवन पुष्प में आप सभी का हार्दिक स्वागत है "

" प्रकृति की गोद में खिला एक सुंदर कोमल पुष्प कली से फूल बनकर अपने सम्पूर्ण वातावरण को सुगन्धित करने का ध्येय रखते हुये कभी गर्मियों की तपिश, तो कभी बरसातों की बौछार, तो कभी शर्दियों की ठिठुरन और ना जाने क्या क्या सहकर ये अपने अस्तित्व को कायम रखने के लिए हर संभव कोशिश करता है। ये आने वाली पीढ़ी का सृजन कर मुरझाकर सूख जाता है और धरती पे गिरकर मिट्टी में विलीन हो जाता है। हमारा संपूर्ण मानव जीवन भी एक पुष्प के समान है...। "

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19 January, 2012

तवायफ़



पाँवों में घुँघरू बँधे है 
समाँ बँधा है ताली से
पत्ता-पत्ता टूट रहा है
मेरे जीवन की डाली से !
मासूमियत उजड़ रही है
सूरत भोली-भाली से
चमक सब खो गई है 
मेरे होठों की लाली से !
हमें बेचकर बचपन में सब
मालामाल हुए दलाली से
मैं भी किसी की बेटी थी 
आज ज़िन्दगी भरी है गाली से !
धन-वर्षा होती रही पर
गुजरी हूँ तंगहाली से
ऐसी क्यों मेरी किस्मत है
कभी पूछूँगी किस्मतवाली से...!

59 comments:

इमरान अंसारी said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति|

रश्मि प्रभा... said...

achhi rachna

dheerendra said...

बहुत सुंदर रचना ,अच्छी प्रस्तुति,......
welcome to new post...वाह रे मंहगाई

ASHA BISHT said...

sundar............mere blog par apka swagat hai...

Rajesh Kumari said...

behad marmik sochne ko majboor karti rachna.

ASHOK BIRLA said...

hridaya dravit karti rachna .....!!

Pallavi said...

वाह क्या बात हाइ कडवे सच को दर्शाती बहुत ही मार्मिक,लेकिन सशक्त एवं प्रभावशाली रचना समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

RITU said...

बहुत सुन्दर..भावपूर्ण ..
kalamdaan.blogspot.com

avanti singh said...

naee tarh ke vichaar se saji kavita.....bhdaai...

S.N SHUKLA said...

सुन्दर सृजन , सुन्दर भावाभिव्यक्ति.

दिगम्बर नासवा said...

क्या पता किस्मतवाली की वजह से हो तंगहाली ... हा हा ...
अच्छी रचना है ...

प्रेम सरोवर said...

आपका पोस्ट अच्छा लगा । मेरे नए पोस्ट "धर्मवीर भारती" पर आपका सादर आमंत्रण है । धन्यवाद ।

mahendra verma said...

कुछ सोचने के लिए बाध्य करती अच्छी कविता।

Naveen Mani Tripathi said...

BHAI NIRALA JI AK TAWAYAF KE DARD KO BILKUL NIRALE ANDAJ ME BAYAN KR DIYA HAI APNE ....KAS AISI RACHANAYEN KUCHH AUR BHI LIKHATE TO SHAYAD SAMAJ KUCHH AUR JAGATA ....FILHAL KOTI KOTI BADHAI...BEHAD MAMSPARSHI RACHANA.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत बढ़िया ..

Rachana said...

bahut sunder abhivyakti .shdon ka achchha upyog kiya hai aapne .
rachana

डॉ. जेन्नी शबनम said...

bahut khoob, badhai.

ऋता शेखर मधु said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति...

amrendra "amar" said...

सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

dheerendra said...

सुंदर अभिव्यक्ति अच्छी रचना,..

NEW POST --26 जनवरी आया है....

Fun and Learns said...

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KANTI PRASAD said...

बहुत सुन्दर रचना!

dheerendra said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति अच्छी लगी.,

welcome to new post --काव्यान्जलि--हमको भी तडपाओगे....

डॉ. जेन्नी शबनम said...

samaj ki vidrupta ka dansh ye jhelti hain, apmaanit hoti hain, samaj mein inke liye koi sathaan nahin fir bhi har samaj inhe jabran banata bhi hai aur apmaanit bhi karta hai. inki vivashta ka bahut achchha chitran.

Reena Maurya said...

बहुत बेहतरीन सृजन है .

कैसे बनाये Valentine’s Day को यादगार said...

ghunghruon ke dard ko bahut prabhavi shabdon me vyakt kiya aapne..

S.N SHUKLA said...

बहुत सुन्दर सृजन, बधाई.

कृपया मेरे ब्लॉग" meri kavitayen" पर पधार कर मेरे प्रयास को भी अपने स्नेह से अभिसिंचित करें, आभारी होऊंगा.

NISHA MAHARANA said...

bahut sundar trike se dard ko ubhara hai.

Piush Trivedi said...

Nice Blog , Plz Visit Me:- http://hindi4tech.blogspot.com ??? Follow If U Lke My BLog????

vidya said...

सोचने को मजबूर करती रचना..

सार्थक लेखन..

प्रेम सरोवर said...

प्रस्तुति अच्छी लगी । इस लिए अनुरोध है कि एक बार समय निकाल कर मेरे भी पोस्ट पर आने का कष्ट करें । धन्यवाद ।

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति। धन्यवाद।

हरकीरत ' हीर' said...

मैं भी किसी की बेटी थी
आज ज़िन्दगी भरी है गाली से .....

आज बेशक तू
समझ पराई मुझे
अंत समय में
बस मेरा ही होगा
सहारा तुझे ....

सदा said...

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

दर्दनाक!

Kewal Joshi said...

बेबस - भावपूर्ण व्यथा.

mridula pradhan said...

bahot achchi.

Shanti Garg said...

बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

Naveen Mani Tripathi said...

behtareen rachana ke liye badhai .....kya ap vapas aa chuke hain....mere do rachanayen apki prateeksha kr rahi hain.

mridula pradhan said...

bahut pasand ayee.....

केवल राम : said...

बेहतर अभिव्यक्ति .....!

कविता रावत said...

सच जिसपर गुजरती है वही जानता है
..सुन्दर मर्मस्पर्शी रचना...

Rachana said...

sunder bhav manoram rachna
rachana

ज्योति सिंह said...

दर्द भरी कहानी है इस घूँघरू की ,रचना गहरी छाप छोडती है और कोई न गुजरे ऐसे हालात से दुआ करती हूँ .

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

बहुत दर्द भरा है इस रचना में उन का जिन बेचारों को किस्मत ने बेच डाला... भगवान सभी को बचाए ऐसी स्तिथि से और उनको पुनः सुखी जीवन में स्थापित करे..

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

आपका ब्लॉग आज फोलो किया है... सुन्दर रचनाओ के लिए आभार

sangita said...

aaj apke blog par aana sarthak huaa sda ki tarah .aabhar.

सूत्रधार said...

आपके उत्‍कृष्‍ट लेखन के लिए आभार ।

G.N.SHAW said...

सुन्दर दर्द !

प्रेम सरोवर said...

बहुत ही मनभावन प्रस्तुति । आपने तो दिल ही जीत लिया । मेरे पोस्ट पर आकर मेरा भी मनोबल बढ़ाएं। धन्यवाद ।

dheerendra said...

वाह!!!!!भावपूर्ण बहुत अच्छी प्रस्तुति सुंदर रचना

MY NEW POST ...सम्बोधन...

vikram7 said...

ॐ नमः शिवाय !! महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये.

mahendra verma said...

पांव के धुंधरू किसी जंजीर से कम नहीं हैं।

अच्छी कविता।

JHAROKHA said...

marm ko sparsh karti prastuti------
poonam

Dev said...

बेहतरीन विषय पर उत्त्कृष्ट प्रस्तुति

दिगम्बर नासवा said...

मारी जीवन का मार्मिक चित्रण ... ये भी एक पहलू है नारी जीवन का ...
संवेदनशील रचना ...

Saras said...

जीवन का एक और दुखद पहलू...मार्मिक अभिव्यक्ति!!!

प्रेम सरोवर said...

मनीष जी, मेरे रजिस्टर में आपको "अनुपस्थित" मार्क किया जा रहा है । मेरे पोस्ट "भगवती चरण वर्मा" पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

Marko Crupi said...

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