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" जीवन पुष्प में आप सभी का हार्दिक स्वागत है "

" प्रकृति की गोद में खिला एक सुंदर कोमल पुष्प कली से फूल बनकर अपने सम्पूर्ण वातावरण को सुगन्धित करने का ध्येय रखते हुये कभी गर्मियों की तपिश, तो कभी बरसातों की बौछार, तो कभी शर्दियों की ठिठुरन और ना जाने क्या क्या सहकर ये अपने अस्तित्व को कायम रखने के लिए हर संभव कोशिश करता है। ये आने वाली पीढ़ी का सृजन कर मुरझाकर सूख जाता है और धरती पे गिरकर मिट्टी में विलीन हो जाता है। हमारा संपूर्ण मानव जीवन भी एक पुष्प के समान है...। "

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23 February, 2019

जीवन का ललकार

जीवन में कितना जंग है !
अब बचा नहीं उमंग है !

एक ही पथ है, एक ही रथ है
फिर अपनों से कैसा हठ है  !


सब सारथि को ललकार रहा
पूर्वज को धिक्कार रहा !
धन –धान्य की वशीभूत में
भौतिक सुखों की अभिभूत में
पुत्र पिता पे हुंकार रहा !!

क्या लाया था, क्या पाया है ?
जो समेट रहे हो सब जाया है
सृष्टी को जानो और धैर्य करो
यहाँ तो प्रभु सब माया है !!

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