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" जीवन पुष्प में आप सभी का हार्दिक स्वागत है "

" प्रकृति की गोद में खिला एक सुंदर कोमल पुष्प कली से फूल बनकर अपने सम्पूर्ण वातावरण को सुगन्धित करने का ध्येय रखते हुये कभी गर्मियों की तपिश, तो कभी बरसातों की बौछार, तो कभी शर्दियों की ठिठुरन और ना जाने क्या क्या सहकर ये अपने अस्तित्व को कायम रखने के लिए हर संभव कोशिश करता है। ये आने वाली पीढ़ी का सृजन कर मुरझाकर सूख जाता है और धरती पे गिरकर मिट्टी में विलीन हो जाता है। हमारा संपूर्ण मानव जीवन भी एक पुष्प के समान है...। "

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01 October, 2017

मेरा रौनक


 
मैं उब गया था जीने से
जब दर्द सिमटा था सीने से !
 
मर ही जाते मयखाने में,
कोई रोका ना होता पीने से !

 
छलते आये जो मासूमियत पे
मुंह मोड़ लूँगा सब  कमीने से !

 
कल तक मुरझाया था ये चेहरा,
धुलकर निखर गया पसीने से ! 

 
उम्मीद सोई थी वर्षों तलक
आज जागी है करीने से !

 
तुम आये तो रौनक आया 
एक जरिया मिला है जीने से...!

2 comments:

Dhruv Singh said...

आपके इस सुन्दर व सार्थक प्रयास के लिए आपको बहुत-बहुत शुभकामनायें
आभार। ''एकलव्य''

Sudha Devrani said...

बहुत ही सुन्दर.....

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