* मुखपृष्ठ * * परिचय * * टैली इनर्जी * * रोमन-हिन्दी * * महाशब्दकोश * * कनवर्टर * * हिन्दी पैड * * संपर्क *
" जीवन पुष्प में आप सभी का हार्दिक स्वागत है "

" प्रकृति की गोद में खिला एक सुंदर कोमल पुष्प कली से फूल बनकर अपने सम्पूर्ण वातावरण को सुगन्धित करने का ध्येय रखते हुये कभी गर्मियों की तपिश, तो कभी बरसातों की बौछार, तो कभी शर्दियों की ठिठुरन और ना जाने क्या क्या सहकर ये अपने अस्तित्व को कायम रखने के लिए हर संभव कोशिश करता है। ये आने वाली पीढ़ी का सृजन कर मुरझाकर सूख जाता है और धरती पे गिरकर मिट्टी में विलीन हो जाता है। हमारा संपूर्ण मानव जीवन भी एक पुष्प के समान है...। "

Followers

06 October, 2011

जिंदगी की पहेली

मेरी जिंदगी की कश्ती बिन माँझी के
ईशारों पे चलता रहा काली आंधी के

मौत की आहट, हमेशा डराती रही
साँस आती रही साँस
 जाती रही।


जख्म नासूर हुआ, थी मरहम की चाहत
खुदा भी रो दिया, देखा जो मेरी हालत 

कतरा कतरा आंसू , पलकों में समाती रही
साँस आती रही साँस जाती रही।

मेरे दर्द-गम में, कई लोग घुल गये
बिछड़े कई तो कई मिल गये।

जिंदगी अपना रंग, कुछ यूँ  दिखाती रही
साँस आती रही साँस जाती रही।

आँसू नही तुझे पसीना बहाना है
खुदी को बुलंद कर, मंजिल तक जाना है।

माँ सिसकती रही और बताती रही
साँस  आती रही  साँस जाती रही।

जिंदगी तो अनसूलझी एक पहेली है
कभी दुश्मन तो कभी सहेली है।

मैं समझा नही, माँ  समझाती रही
साँस आती रही साँस  जाती रही।

6 comments:

संजय भास्कर said...

बहुत बढ़िया,
बड़ी खूबसूरती से कही अपनी बात आपने.....

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 10/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

vidya said...

सचमुच अनगढ़ पहेली ही तो है ये जीवन...

बहुत सुन्दर रचना...
शुभकामनाएँ.

Swati Vallabha Raj said...

सच कहा अपने..कभी पहेली तो कभी सहेली है ये जिंदगी...सुन्दर रचना..

सदा said...

बहुत बढि़या।

Reena Maurya said...

जिंदगी के अजीब किस्से है
कभी सहेली बन साथ निभाती है
तो कभी पहेली बन उलझाती है
बेहतरीन रचना..

There was an error in this gadget

लिखिए अपनी भाषा में...

जीवन पुष्प

हमारे नये अतिथि !

Angry Birds - Prescision Select