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" जीवन पुष्प में आप सभी का हार्दिक स्वागत है "

" प्रकृति की गोद में खिला एक सुंदर कोमल पुष्प कली से फूल बनकर अपने सम्पूर्ण वातावरण को सुगन्धित करने का ध्येय रखते हुये कभी गर्मियों की तपिश, तो कभी बरसातों की बौछार, तो कभी शर्दियों की ठिठुरन और ना जाने क्या क्या सहकर ये अपने अस्तित्व को कायम रखने के लिए हर संभव कोशिश करता है। ये आने वाली पीढ़ी का सृजन कर मुरझाकर सूख जाता है और धरती पे गिरकर मिट्टी में विलीन हो जाता है। हमारा संपूर्ण मानव जीवन भी एक पुष्प के समान है...। "

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15 August, 2012

जागो भारत जागो !


ये कैसी तेरी निर्मम प्यास,
ये कैसी सियासत की भूख !
 जो क़त्ल करके मानवता का
ले रहे हो सत्ता का सुख !!

 लूट की भूख जब जगती है
तब खाते हो हमसब की रोटी 
बनकर दुह्शासन कलयुग का
खीचते हो गाँधी की, एकलौती धोती 

हसरतों को जगने से पहले
जहर देकर, सुला देते हो 
हमारे आंसुओं के आगे तुम
पसीना समझ कर हवा देते हो ।।

इस सफ़ेद कुरतों के आगे
भोली जनता आजतक भागे ।
हर बार भुलाते रहे, ये अपना दर्द 
और सत्ता में लाते रहे, एक नामर्द ।।


अब सबको फर्ज निभाना होगा 
जन-जन को जगाना होगा ।
जो बदरंग बना है अपना तिरंगा 
हमें मिलकर पवित्र बनाना होगा ।।

7 comments:

  1. सुन्दर भाव लिए बेहतरीन रचना..
    स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाये..
    :-)

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  2. वे क़त्ल होकर कर गये देश को आजाद,
    अब कर्म आपका अपने देश को बचाइए!

    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाए,,,,
    RECENT POST...: शहीदों की याद में,,

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  3. काश के भारत जागे.....
    सशक्त रचना.
    स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    अनु

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  4. सशक्त रचना...हार्दिक शुभकामनाएँ !!!

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  5. सहगल ढिल्लन शाहनवाज
    इन्कलाब जिंदाबाद ....
    एक नहीं कई नाम
    आज आजादी खोजते हैं
    पूछते हैं सवाल
    कहाँ गये -
    लाल बाल पाल
    जिन्होंने कहा था
    - " आजादी याचना से नहीं मिलती
    बल्कि इसके लिए संघर्ष करना पड़ता है। "
    किसने मिटा दिया भारत माँ की हथेलियों से
    इक़बाल के ये शब्द -
    "नहीं है नाउम्मीद इक़बाल अपनी किश्ते-वीरां से
    ज़रा नम हो तो ये मिट्टी बड़ी ज़रखेज़ है साक़ी"
    फांसी की लकीरों से बेखबर
    भगत, सुखदेव, राजगुरु
    वक़्त से पहले अपने बच्चों की कुर्बानी के आगे
    सिसकियों को पी जानेवाली उनकी माएँ
    पूछते हैं आज के आडम्बर से -
    " किसने छिना है मेरा प्यारा वतन
    प्यारा वतन मेरा प्यारा वतन
    जिस वतन के लिए सैकड़ों मर गए
    नाम जिंदा शहीदों में जो कर गए
    खूं से सींचा था हमने जो ये चमन
    कहो -
    किसने छिना है हमसे ये प्यारा वतन ..."

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  6. अमीन ... संकल्प लेने का संमय है आज ..
    १५ अगस्त की बधाई ...

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  7. सशक्‍त भाव लिए उत्‍कृष्‍ट अभिव्‍यक्ति

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